जमीन अतिक्रमण के मामले में नायब तहसीलदार से मिले नोटिस के बाद कौहाकुंडा के रहवासी रिक्शे में शिवलिंग को लेकर न्यायालय पहुंच गए। नोटिस मिलने के बाद से ही यह मामला चर्चा में था। आज शिवलिंग को मोहल्लेवासियों द्वारा न्यायालय लेकर पहुंचने से मामला फिर से चर्चा का विषय बना गया। लोग उत्सुकता वश कोर्ट परिसर पहुंचने लगे।


भगवान आम लोगों के लिए आस्था का विषय हो सकते हैं लेकिन राजस्व अधिकारियों के लिए मात्र प्रतिवादी है। यह कथन आज न्यायालय प्रक्रिया के दौरान साबित हो गया। शहर के कौहकुंडा में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत के बाद 10 लोगों को नामजद नोटिस थमाया गया था। इसमें छठवें नम्बर में भगवान शिव का मंदिर भी शामिल था। नायब तहसीलदार ने नोटिस भगवान शंकर के नाम से थमाया था, लिहाजा यह प्रकरण काफी सुर्खियों में रहा। किसी ने सोचा भी न था कि नोटिस का पालन करने लोगा मंदिर में स्थापित शिव​लिंग और जलहरी को ही उखाड़कर कोर्ट में पेश करने पहुंच जाएंगे। हालांकि इसका विरोध अबतक कहीं से नहीं किया गया है। प्रशासन की कार्रवाई से लोग हैरत में हैं।

नोटिस के अनुसार शुक्रवार 25 मार्च को शंकर भगवान की पेशी थी। भगवान साक्षात नहीं सकते थे लिहाजा राजस्व अधिकारियों के आदेश पर मोहल्लेवासियो ने मंदिर में स्थापित शिवलिंग और जलहरी को ही उखाड़कर रिक्शे में तहसील परिसर में ले आए।

गौरतबल है कि बीते दिन हाई कोर्ट में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा को लेकर एक याचिका लगाई गई है। इसके बाद हाई कोर्ट ने जिला प्रशासन को नोटिस जारी किया है और कार्रवाई का विवरण मांगा है। इसके बाद ही यहां यह कार्रवाई हुई है। खबर लिखे जाने तक प्रकरण में कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। स्थिति यह बन गई कि राजस्व न्यायालय ने पेशी की नई ति​थि दे दी है।