मौत के ये मामले भागलपुर और मधेपुरा ज़िलों में सामने आए हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट में मरने वालों की संख्या 20 से 30 बताई जा रही है. बिहार में अप्रैल 2016 से शराब की बिक्री और खपत पर प्रतिबंध लगा हुआ है. हालांकि इस पर अमल को लेकर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं. राज्य में कथित तौर पर ज़हरीली शराब से लोगों की मौत की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं.​


(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

भागलपुर/मधेपुरा: शराबबंदी वाले बिहार राज्य में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से एक बार फिर मौत के कई मामले सामने आए हैं. राज्य के दो जिलों में होली के त्योहार के दौरान कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई. पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी.

भागलपुर जिले में आठ लोगों की मौत हुई है. इनमें से चार की मौत भागलपुर शहर के साहिबगंज इलाके में, जबकि शेष लोगों की मौत नारायणपुर पुलिस थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों में हुई है.

हालांकि मौत के आंकड़े और अधिक हो सकते हैं. दैनिक जागरण ने अपनी रिपोर्ट में जहां कथित तौर पर जहरीली शराब के कारण 20 लोगों की मौत होने की जानकारी दी है, वहीं हिंदुस्तान ने अपनी रिपोर्ट में मृतकों का आंकड़ा 30 होने की आशंका जताई है.

नारायणपुर पुलिस थाना प्रभारी रमेश शाह ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा कि ये मौतें जहरीली शराब पीने से हुई हैं, या नहीं.

उन्होंने यह दावा भी किया कि मृतकों में शामिल एक व्यक्ति को संभवत: दिल का दौरा पड़ा था और एक अन्य सीढ़ी पर चढ़ने के दौरान गिर गया था.

विश्वविद्यालय पुलिस थाना प्रभारी रीता कुमारी ने भी कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही जहरीली शराब पीने से मौत होने की पुष्टि हो सकेगी. उल्लेखनीय है कि इसी थाना क्षेत्र में साहिबगंज पड़ता है.

साहिबगंज निवासी एक व्यक्ति के आंखों की रोशनी चली गई है और उसका एक अस्पताल में इलाज चल रहा है. स्थानीय लोगों ने घटना को लेकर रविवार सुबह अपना आक्रोश प्रकट करते हुए सड़क पर टायर जलाए. पुलिस द्वारा उन्हें समझाने बुझाने के बाद यातायात बहाल हुआ.

इसके अलावा, मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड (ब्लॉक) में दो लोगों की मौत हो गई. वहां स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि नकली शराब का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है.

मुरलीगंज थाना प्रभारी राजकिशोर मंडल ने कहा कि मौत के कारणों का पता नहीं चल सका है, क्योंकि मृतकों के परिवार के सदस्यों ने घटना के बारे में पुलिस को सूचना मिलने से पहले ही शवों की अंत्येष्टि कर दी.

उधर, जहरीली शराब पीने के बाद सात लोग बीमार पड़ गए और उन्हें स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है.

मालूम हो कि बिहार में अप्रैल 2016 से शराब की बिक्री और खपत पर प्रतिबंध लगा हुआ है. हालांकि इस पर अमल को लेकर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं. राज्य में कथित तौर पर जहरीली शराब से लोगों की मौत की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं.​

बीते जनवरी महीने में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृहजिले नालंदा में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत हो गई थी.

पिछले साल दीपावली के आसपास बिहार के चार जिलों (पश्चिम चंपारण, गोपालगांज, समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर) में अवैध शराब ने 40 से अधिक लोगों की जान ले ली थी, जिसके बाद बिहार में मद्य निषेध कानून को लेकर सवाल उठने लगे थे.

पुलिस रिकॉर्ड से पता चलता है कि दिसंबर 2021 तक शराबबंदी कानून के तहत 3.5 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए और चार लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया.

26 दिसंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना ने किसी कानून का मसौदा तैयार करने में दूरदर्शिता की कमी के उदाहरण के रूप में बिहार के शराबबंदी कानून का हवाला दिया था.