यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency) और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस (Roscosmos) के एक्सोमार्स ट्रेस गैस ऑर्बिटर (TGO) ने मंगल ग्रह (Mars) पर एक महत्वपूर्ण मात्रा पानी की खोज की. ये पानी लाल ग्रह के वैलेस मेरिनेरिस घाटी सिस्टम की सतह के नीचे छिपा हुआ था.

बताया गया है कि जिस जगह पर पानी छिपा हुआ है, वह पृथ्वी के ग्रैंड कैन्यन से पांच गुना गहरा और दस गुना लंबा है. मंगल पर खोजे गए जलाशय का आकार लगभग 45,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक है, जो भारत के हरियाणा राज्य के आकार के समान है.

ऑर्बिटर के 'फाइन रिजॉल्यूशन एपिथर्मल न्यूट्रॉन डिटेक्टर' (FREND) इंस्ट्रूमेंट की मदद से पानी का पता लगाया गया. लाल ग्रह के भूदृश्य का सर्वेक्षण FREND द्वारा किया जाता है. यह मंगल की मिट्टी में छिपे हाइड्रोजन की उपस्थिति और सांद्रता की मैपिंग भी करता है.

मिट्टी में न्यूट्रॉन का उत्सर्जन करने के लिए हाई एनर्जी कॉस्मिक किरणों को सतह पर भेजा जाता है. ऐसा कहा जाता है कि गीली मिट्टी सूखी मिट्टी की तुलना में कम न्यूट्रॉन का उत्सर्जन करती है, जो वैज्ञानिकों को मिट्टी की जल सामग्री की जांच करने में मदद करती है.