पंजाब के मनसा जिले के जावर के गांव में रविवार को सिद्धू मूसावाला की हत्या कर दी गयी थी. जानकारी के मुताबिक सिद्धू मूसावाला का उनके गांव मूसा में अंतिम संस्कार किया जाएगा. इधर हत्या के इस मामले में पंजाब पुलिस ने जांच करने के लिए CCTV कैमरों की मदद ली है. कई गिरफ्तारियां हुई हैं और कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है.



सिद्धू मूसावाला की पोस्टमार्टम रिपोर्ट- गोलियों से भून डाला था शरीर
पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या के 24 घंटों के बाद पोस्टमार्टम किया जा सका. इस पोस्टमार्ट के लिए पांच डॉक्टरों का पैनल भी था. रिपोर्ट्स की मानें तो सिद्धू मूसेवाला के शरीर पर करीब दो दर्जन गोलियों के घाव दे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मानें तो सिद्धू की मौत ज्यादा खून बहने की वजह से हुई है. खबरों की मानें तो मूसेवाला के शरीर के कई पार्ट्स में चोट लगी है. साथ ही उनके सिर की हड्डी में भी गोली लगी थी. पोस्टमार्टम के बाद सिद्धू मूसेवाला के शव को उनके घर वालों को सौंप दिया गया और विसरा के सैंपल्स आगे की जांच के लिए भेजे गए हैं.

कैसे की गयी थी हत्या ?
सिद्धू मूसेवाला अपने दो दोस्तों के साथ अपनी गाड़ी थार में सवार होकर कहीं जा रहे थे. वारदात के दौरान मौजूद उनके दोस्त के मुताबिक उनकी गाड़ी में 5 लोगों के बैठने की जगह नहीं थी, इसलिए सिद्धू ने अपने सुरक्षा कर्मियों को साथ नहीं बैठाया. सिद्धू की गाड़ी जैसे ही वह गांव से कुछ दूर पहुंची तो उनके पीछे से एक फायर हुआ. इतने में एक गाड़ी उनके आगे आकर रुक गई. तभी एक युवक गाड़ी के सामने आया और उसने कई गोलियां चलाईं. ताबड़तोड़ गोलीबारी में सिद्धू मूसावाला की दर्दनाक मौत हो गयी.

कॉन्ट्रोवर्सी और सिद्धू मूसावाला 
सिद्धू मूस वाला ने निंजा के गीत 'लाइसेंस' के लिए एक गीतकार के रूप में अपना करियर शुरू किया था और और 'जी वैगन' के साथ अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत की थी. 28 वर्षीय मानसा के पास मूस वाला गांव के रहने वाले पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसावाला ने  पिछले कुछ सालों में कई सुपरहिट गाने दिए थे, हालांकि, गायक अपने करियर के दौरान कई विवादों में भी रहा.

सिद्धू मूसावाला ने निंजा के गीत 'लाइसेंस' के लिए एक गीतकार के रूप में अपना करियर शुरू किया और 'जी वैगन' के साथ अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत की. साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले सिद्धू मूसावाला कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए. उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर मानसा से चुनाव भी लड़ा लेकिन आप के डॉ विजय सिंगला से जीत नहीं पाए.

सिद्धू मूसावाला को  गैंगस्टर रैप 'लीजेंड', 'डेविल', 'जस्ट सुनो', 'जट दा मुकाबाला' और 'हथियार' जैसे पंजाबी गानों के लिए जाना जाता था.  अपने सिंगिंग करियर में सिद्धू मूसावाला कई कॉन्ट्रोवर्सी में भी रहें.

बंदूक संस्कृति को बढ़ावा देना.

वो  खुले तौर पर बंदूक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते थे, उत्तेजक गीतों में गैंगस्टरों का महिमामंडन करते दिखते थे. उन पर अपने गीत "संजू" में हिंसा और बंदूक संस्कृति को बढ़ावा देने के  आरोप भी लगे..

सितंबर 2019 में रिलीज़ हुए उनके गीत 'जट्टी जियोने मोड़ दी बंदूक वर्गी' ने 18 वीं शताब्दी के सिख योद्धा माई भागो के संदर्भ में एक विवाद को जन्म दिया था जो चर्चा का विषय बना रहा था. हालांकि मूसेवाला ने बाद में इस पर माफी मांग ली थी.

अप्रैल 2022 में, सिद्धू मूस वाला ने अपने नवीनतम गीत 'बलि का बकरा' में आम आदमी पार्टी (आप) और उसके समर्थकों को निशाना बनाया था और खूब सुर्खियां बटोरकर विवाद खड़ा कर दिया था. गीत में आप समर्थकों को गद्दार कहा गया था.

सिद्धू मूसे वाला का नाम भी दिसंबर 2020 में खालिस्तान से जुड़ा था, मूसावाला ने खालिस्तानी अलगाववादी जरनैल सिंह भिंडरावाले का उनके एक गाने 'पंजाब: माई मदरलैंड' में समर्थन किया था. 

मई 2020 में मूस वाला के दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसमें वो पांच पुलिसकर्मियों के साथ एक एके-47 और एक निजी पिस्तौल चलाने की ट्रेनिंग लेते दिखे थे. जिसको लेकर मूसेवाला पर आर्म्स एक्ट में मामला दर्ज हुआ था. पुलिस ने मूसेवाला को पकड़ने के लिए छापेमारी शुरू कर दी थी.कुछदिन भूमिगत रहने के बाद मूसेवाला को जमानत मिल गयी थी.