घडी को इस दिशा में भूलसे भी ना लगाए इससे नकारात्मकता फैलती है

घड़ी किसी भी घर के लिए एक आवश्यक उपकरण है। यह हमें प्रकृति के सबसे कीमती उपहार यानी समय के बारे में जानकारी देता है।
प्राचीन काल से लेकर आज तक घड़ी के आकार में कई बदलाव हुए हैं लेकिन एक चीज कभी नहीं बदली। वह है – समय। यह हमेशा अपनी नियमित गति से चलता है। यह कभी किसी का इंतजार नहीं करता।

भारतीय वास्तुकला और चीनी फेंग शुई भी बताते हैं कि कैसे घड़ी इंसान के लिए अच्छा और बुरा समय ला सकती है। होम क्लॉक में क्या देखना है, इसके बारे में कई नियम हैं। इससे हम जीवन में शुभ समय की शुरुआत कर सकते हैं। जानिए उन नियमों के बारे में…

दक्षिण दिशा को यम का मार्ग माना जाता है। दूसरे शब्दों में, मृत्यु की दिशा। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के दक्षिण भाग में कभी भी घड़ी नहीं लगानी चाहिए। दक्षिण दिशा में पहनी जाने वाली घड़ी को रिश्तेदारों की उम्र और सौभाग्य के लिए अशुभ माना जाता है।

हमारे आस-पास के वातारण में जो चीजें मौजूद होती हैं उनकी ऊर्जा हमारे जीवन को काफी हद तक प्रभावित करती है। यह ऊर्जा यदि सकारात्मक है तो हम अच्छा महसूस करते हैं और यदि किसी वस्तु की ऊर्जा नकारात्मक हो तो यह हमारी पूरी लाइफ स्टाइल को खराब करती है। चीजों की इसी ऊर्जा को सही क्रम लगाने को वास्तुदोष मिटाना और इससे संबंधित विज्ञान को वास्तुशास्त्र कहते हैं।

वास्तुशात्र के अनुसार, हमारे में लगी घड़ी हमारे समय को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि घर में लगी घड़ी सही दिशा में है तो इंसान काफी हद तक सुख समृद्धि का अनुभव कर सकता है लेकिन अगर यही घड़ी गलत दिशा में है तो परेशानी का सबब बन सकती है। तो आइए जानते हैं घर में किस दिशा में लगाएं घड़ी-

दक्षिण दिशा में होता है काल का प्रभाव
माना जाता है कि घर के दक्षिण में काल का वास होता है। ऐसे में कोई यदि दक्षिण की दीवार में घड़ी लगाता है तो घर के लोगों का समय काल के हाथ में चला जाता है। ऐसा होने से घरवालों को अकालमृत्य का भय बना रहता है। घर के मुख्य सदस्य बीमार रहता है उसकी उम्र घटती है।

बहुत पुरानी, ​​बार-बार क्षतिग्रस्त और सना हुआ कांच वाली घड़ियां भी शुभ नहीं मानी जाती हैं। ये पारिवारिक सफलता में बाधक हैं। मेहनत का उचित फल नहीं मिलता।

(इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)